انتَ  ربّی   انتَ  ربّی

 

 

ارشاد  عرؔشی  ملک  پاکستان

 

ہر  ذرّے  کے  لب  پہ  صدا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

گو  کہنے  کی   طرز   جدا  ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

گا تی   پھرتی   باد   صبا    ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

بہتے  جھر نے   کا  نغمہ   ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

محو   تکلم  مست  گھٹا  ہے    ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

کہتا   بجلی  کا   کڑ کا   ہے    ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

ہر   شئے  کا  آئین   وفا  ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

ہر  ذی  روح  کا   حرف  د عا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

سننے  والے  کان  نہیں  جس شخص  کے  وہ کیا  جانے

د شت  و  جبل  میں شو ر  بپا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

ہر  لمحے   کی  کو کھ   سے  پیہم  تازہ  لمحے   پھو ٹیں

ہر  لمحہ  مصرو ف   ثناء  ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

تیرے جلوے  دیکھ کے  میری آنکھیں  بھی  چند ھیا ئں

ایک  طلسم  ہوش   ربا  ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

روز  ازل  سے  پہلے  تو  تھا  ،  بعد  ابد   بھی  تو  ہے

تو  قا ئم  ہے  تجھے  بقا   ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

جا ہل  ہے  وہ   دانشو ر   جو   تجھ  کو   نہ   پہچا نے

اس کی  دانش  ایک  سزا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

مجھ  سے  بھو لے  بھٹکو ں کو  تو  سید ھی  راہ  پہ  لا یا

تو  رہبر  تو   راہنما   ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

میں  تیری  دہلیز  نہ  چھو ڑ و ں  موسم آئیں  جائیں

راس مجھے یہ آب  و  ہوا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

جھو لی  خا لی  ہا تھ  سوا لی  ،  لب  پر  چپ  کا  تا لا

میں  سائل  ہوں تو  دا تا ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

دکھ سکھ  کے لمحوں  میں  تیری  یاد  کی  چادر  اوڑھوں

تو  مجھ  بے کس  کا  پردہ  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

دنیا  سے منہ موڑ  کے  میں  نے  تجھ سے  نا طہ  جوڑا

دنیا  کی  اب  کیا  پروا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

تو  معشو ق  ہے  تو  ما لک  ہے ، میں  عا شق  میں نوکر

تجھ کو  ہر  اک  ناز  روا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

مر  کر  تجھ  سے  ملنا  ہے  تو  جلد  مجھے  موت  آئے

ہجر  میں  جینا  ایک  سزا   ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

مجھ  بیمار  کو  میرے  حال  پہ  چھو ڑ و  میرے  پیا رو

درد  دوا  ہے  ،روگ  شفا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

میں  منگتی  ہوں  تیرے  در  کی  بھر  کشکو ل  مرا

تو  تو  شاہ  جود  و  عطا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

بھو ل  تو  ہو تی  رہتی  ہے  پر بخشش  کی  ہوں  طا لب

بند ی  ہوں  میں کام خطا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

روز  ازل  جب ہم  نے  تجھ سے عہد  وفا  کا  باندھا

یاد  مجھے  وہ  عہد  وفا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

تیرے  در   پر  جھکنے   والے   سر فراز   ہوئے

سجدہ  کیا  ہے  راہ  فنا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

دل  ناقص  ہیں  بے  قیمت  ہیں  بس  انمول ہیں 

جن  پر  تیرا  نام لکھا  ہے   ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

تو  خالق  ہے  تو  مالک  ہے حکم  تجھی  کو  زیبا

کام  مرا تسلیم  و  رضا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

چین  سے  جیتے  ہنستے  بستے  کس  نے  تجھ  کو  پایا

تو  در  بدری  میں  ملتا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

جس کو  اپنی  جان  ہے  پیا ر ی  وہ  واپس  مڑ  جا ئے

کو ہ عشق  ہی  کوہ  ندا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

خا لق  کا   مخلوق  سے   رشتہ  ایک  انوکھا   رشتہ

پہلی  پھو نک پہ دل  دھڑکا ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

تیرے  بندے تجھ  سے  غافل  دھکے کھا تے  دیکھے

دل  پہ  بھا ری  بوجھ  دھرا ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

فن  کی  بھیک  عطا  کر  مالک  تیرے  نغمے  لکھوں

عجز  قلم  کو  روک  رہا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

میں  خوابوں  کی  وادی  میں بھی  تیرے گیت  الاپوں

لب  پہ مصرح  خوب چڑھا  ہے  ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

 

جس  نے  تجھ  کو  پایا  عرؔشی  خود  کو  کھو  کر  پایا

یاں  تُکا،نہ  تیر  لگا  ہے ا نتَ  ربّی  ا نتَ   ربّی

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